जनसंख्या का बढ़ना, अब भी एक बीमारी है लूट स्कूलों, हॉस्पिटलों की , अब भी क्यों जारी है दबे, उजड़े लोगो... जनसंख्या का बढ़ना, अब भी एक बीमारी है लूट स्कूलों, हॉस्पिटलों की , अब भी क्यों जा...
आती न लाज तुमको, इंसान वेश में। आती न लाज तुमको, इंसान वेश में।
क्या बतायें हम दिल का दीवाला निकाले बैठे हैं। क्या बतायें हम दिल का दीवाला निकाले बैठे हैं।
राजनीति का रंगमंच है दर्शक हम असली हैं। राजनीति का रंगमंच है दर्शक हम असली हैं।
जो हाथ इन बच्चियों पर अब उठेगा कटेगा-कटेगा-कटेगा।। जो हाथ इन बच्चियों पर अब उठेगा कटेगा-कटेगा-कटेगा।।
तब हमें तंत्र की क्या जरुरत ? पीट लें छाती या पीट लें कप्पार परिजन निःसहाय थे अन्याय का परिदृश्य ... तब हमें तंत्र की क्या जरुरत ? पीट लें छाती या पीट लें कप्पार परिजन निःसहाय थे ...